हमारे बारे में

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जिओपोलिटिकल स्ट्रेटेजिक एंड सिक्योरिटी स्टडीज इंस्टिट्यूट (जिप्सी) अपनी तरह का पहला संस्थान है जिसमे हम भारत के दृष्टिकोण से बाकी दुनिया के राजनैतिक और सामरिक सुरक्षा की स्थिति का   अध्ययन करते हैं| हमारे साथ जुड़ी देश की फिक्रमंद बुद्धिजीवी जमात के बीते चालीस सालों के समर्पित अध्ययन का नतीजा है कि हम हिंदुस्तान से जुड़े कमोबेश हर मामले को अपने अध्ययन में शामिल कर सके हैं|

जिप्सी में हमारा सतत प्रयास रहता है कि ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा धार्मिक, अध्यात्मिक, राजनीतिक और नैतिक तरीकों से निर्बाध रूप से किये जा रहे शोषण के सत्य को उजागर करें| हमारा विश्वास है कि सत्य में ही वह ताकत है जो भौतिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, बौद्धिक, सामाजिक और अध्यात्मिक गुलामी के सभी तरीकों से मुक्ति दिला कर जानवर से श्रेष्ठ मनुष्य बनाती है|    

जिप्सी एक प्रयास है अनुभव और तर्क से प्राप्त ज्ञान को सभी भारतीयों तक पहुँचाने का, ताकि भारतीयों की सामूहिक शक्ति तय कर सके कि भारत को अपने सम्मान और ज्ञान सत्ता केंद्र की प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करने के लिए क्या करना चाहिए| इस प्रकार सारी दुनिया को ज्ञान ज्योति से आलोकित करके मानवता को देवतुल्य बना सकें| दुनिया के सुरक्षित गर्भगृह के रूप में भारत ने सारी दुनिया के शोषित, पीड़ित समुदाय को शांति, मुक्ति और प्रगति की राह दिखाई है|   

जिप्सी भारत और भारतीयों का प्रतिबिम्ब है| हमारा भारत सिर्फ ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा बनाई भौतिक व्यवस्था भर नहीं जिस पर वे भूराजनीतिक उद्देश्यों के तहत काबिज थे और कमोबेश आज भी हैं| यह सिर्फ उन्ही के लिए नहीं जो भौतिक रूप से ब्रिटिश पोलिटिकल इण्डिया में जन्म लिए बल्कि उन सभी के लिए है जिन्होंने तमाम संघर्षो के साथ अपने दिल में भारतीयता और भारत को जिन्दा रखा है|    

तमाम भयावह अभावग्रस्त जीवन से जूझते उन सभी भारतीयों के लिए जो इंसानियत और सम्मानपूर्वक जीवन की उम्मीद में घनघोर उपेक्षाओं के साथ दिल में ये तमन्ना लेकर जीते हैं कि एक दिन जरुर उनका उनका देश भारत पिछले दो सौ सालों के दुखभरे सपने से उबर कर मानवता को वो रास्ता दिखायेगा जिसके लिए इस देश को विश्व गुरु कहा जाता रहा है| दुनिया के तमाम महान विद्वानों, अन्वेषकों, सच्चे अध्यात्मिक गुरुओं और अनेक महान विभूतियों को उस दिन का इन्तेजार हैं जब यह देश जागेगा और अपने आप से अपनी आतंरिक ताकत पहचान कर उन सभी समस्याओं को दूर करेगा जिन्हें हम दो हजार सालों से झेल रहे हैं| जबकि भारतीय यह नहीं जानते कि उनकी अंदरूनी ताकत क्या है, अपनी समस्याओं के लिए सशंकित भाव से यह तय करने में सक्षम नहीं कि उनकी समस्याओं का वाजिब समाधान क्या हो और कैसे हो? यह उस देश का हाल है जो पूरी दुनिया समस्याओं के समाधान की क्षमता रखता है, जो दुनिया के लिए एक नजीर रहा है| हमारा प्रयास है इन सभी संघर्षों को लिपिबद्ध करके सबके सामने रखें ताकि भारत और पूरे विश्व की जागृति हो|   

जिप्सी नाम उस कौम के लिए एक श्रद्धांजलि है जो सत्य के लिए लड़े जो हजारों सालों तक दुनिया में घूमे| उनको सलाम है जो यात्रियों के रूप में, आम आदमी के रूप में, अध्यात्मिक गुरुओं के रूप में और जिंदगी की तमाम विधाओं के विद्वानों के रूप में सच्चाई, बराबरी, समृद्धि और आज़ादी की चेतना लिए पूरी दुनिया में प्रगति की मिसाल बने|

जिप्सी का लोगो प्रतीक है बारह आदित्यों का जो उर्जा के अभिन्न स्तर हैं, जो आदमी की चेतना में मौजूद हैं और ब्रह्माण्ड में भी| लोगो के बीच में दिखाई देने वाली आँख हमारी अपनी चेतना है जिसे समग्रता में समझा जाना जरुरी है| सत्य के बाहरी स्तर को और बारह स्तर की आंतरिक अनुभूतियों की समग्रता सत्य के खोज की सामर्थ्य हैं| इस समग्रता की अनुभूति में वाह्य और आतंरिक उर्जा से वह शक्ति मिलती है जिससे सत्य के साथ जीवन जीना संभव है| इसी सत्य से दीर्घकाल से शोषित मानवता की मुक्ति हो सकेगी|       

दूसरे अर्थों में जिप्सी युगों पुराने भारत और भारतीयों की वह कथा है जिसमे अब तक की हालत बयां की गयी है| ब्रिटिश भारत की भौगोलिक सीमा के भीतर और बाहर दुनिया भर में मौजूद मौजूद सभी भारतीयों को भारत की समग्रता की युग प्राचीन प्रतिष्ठा से परिचित कराना ही हमारा प्रयास हैं|

हमारे पास क्रिया पक्ष के दो विकल्प हैं| पहला ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा पोषित उपेक्षा जो अनकहे तौर पर गुलामी का पर्याय बन चुकी है, से मुक्ति पाकर| इसके लिए जरुरी है कि ब्रिटिश साम्राज्य की तर्ज पर पश्चिम के नक़ल वाली भेडचाल से बचें और पूर्व के लिए पूर्व की ओर देखें क्योंकि पूर्व के लिए केंद्र भारत ही है| दूसरा अपनी सामर्थ्य को समय और स्थान के मुताबिक हम महसूस करें कि हम कौन हैं, और क्या हैं, हमें क्या होना चाहिए जिससे मानवता के लिए अपने संसाधनों से कैसे उन सभी समस्याओं का समाधान करें जिन्हें हमने दो शताब्दियों तक सहा है| उस शोषण से जो प्रजा को बेदम करके काबू करके संसाधनों को चूसने के लिए बुना गया उससे कैसे बचें|

तमाम विद्वान नेताओं और आम लोगों को इंतजार हैं कि यह देश इन संकटों से उबर कर कब जागृत होगा|

जिप्सी इस दिशा में एक विनम्र शुरुआत है और हम सभी लोगों से निवेदन करते हैं कि वे इस प्रयास में आलोचक और सहयोगी दोनों रूपों में साथ जुड़ें, सहारा दें|

इस वेबसाइट में प्रस्तुत विचार श्रंखला किसी दल या नेता के पक्ष अथवा विपक्ष में नहीं| हमारी विचार श्रंखला दलीय अनुचरों के इष्ट अवतारों के लिए भी कोई चुनौती नहीं| भारतीय पत्रकारिता के वर्तमान भक्तिकाल में हमारी विचार श्रंखला भारत के लिए है, भारत में हो रही त्रासदियों की विवेचना के लिए है| दलीय निष्ठां वाले नेताओं की और उनके दर्शन की परीक्षा उनके नेताओं के जुमलों, कारनामों और नीतियों से भारत, भारतीयता और भारतीयों पर पड़ने वाले असर से जाहिर है| इसीलिए हम हर राजनीतिक दर्शन और उसके नेताओं के बनने और बिगड़ने की प्रक्रिया पर पैनी नजर रखते हैं.

 

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